वो क्षण जब भीतर कोई बोलने वाला नहीं रहा
ये किसी बड़े हादसे की कहानी नहीं है।ना कोई टूटन।ना कोई चमत्कार। ये उस साधारण क्षण की बात हैजब भीतर से जवाब देने वाला थक गया। अब तक जीवन सवालों से चलता था।कोई कुछ कहता, भीतर जवाब उठता।कोई देखता, भीतर प्रतिक्रिया बनती।कोई परिस्थिति आती, भीतर अर्थ खोजा जाता। पर उस दिनजवाब आने में देर हुई।इतनी … Read more