जब भीतर कोई जवाब बचा ही नहीं

मनुष्य को हमेशा लगता है कि जीवन किसी उत्तर की तरफ बढ़ रहा है। जैसे कहीं कोई अंतिम समाधान रखा हो, जिसे पा लेने के बाद सब स्पष्ट हो जाएगा। इसी उम्मीद में सवाल पैदा होते हैं। सवालों के साथ खोज चलती है। और खोज के साथ एक बेचैनी भी चलती रहती है। पर कभी-कभी … Read more

जहाँ अनुभव को समझने की ज़रूरत नहीं रहती

मनुष्य की सबसे पुरानी आदत है किसी भी अनुभव को तुरंत समझ लेना।जो घट रहा है, उसे नाम देना।जो महसूस हो रहा है, उसे परिभाषित करना। दुख आया तो कहा गया – यह गलत है।सुख आया तो कहा गया – यह अच्छा है। और इसी जल्दी में अनुभव अपने पूरे रूप में कभी जिया ही … Read more